दोस्तों से बिछड़ के यह एहसास हुआ ग़ालिब,
जो कभी खत्म नहीं होती, बस और बढ़ती जाती है!
जब दो उंगलियाँ जोड़ने से दोस्ती हो जाती थी।
“तेरी मुस्कान में जैसे प्रकाश, दोस्ती में वही सुकून का एहसास।”
थे तो कमीने, लेकिन रौनक भी उन्हीं से थी।
पर उनकी यादें हर वक़्त दोस्ती बनकर जीती हैं।
तू है मेरा जिगरी यार, तुझसे ही मेरी दुनिया सवेरा है,
पर अब यही दोस्ती हमें रास्ते में छोड़ जाती है।
ਪਰ ਦੋਸਤ ਜਿਹੜਾ ਰੂਹ ਨੂੰ ਛੂਹ ਜਾਵੇ, ਵਖਰਾ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਏ।
हमारी दोस्ती में जितना प्यार है, उतनी शरारतें भी हैं,
पाँच मिनट बाद वही दोस्त मुझे… “खो गए Dosti Shayari क्या?” कह कर मजाक उड़ाते हैं!
यूँ ही हर शख़्स जन्नत का हक़दार नहीं होता।
बस तू और मैं एक दूसरे को हर दिन किचन में हलचल करते रहते हैं!
जिसे हमने दोस्त समझा था, वही अब अजनबी सा लगता है,